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12/29/2010

वही रास्ता वही मंजिल

वह जहाँ होता हैं  वहाँ शांति ही शांति होती हैं ,प्रेम होता हैं ,विश्वास होता हैं ,उसका हर रूप ह्रदय में अद्भुत आनंद भर देता हैं .
उसकी खोज मैंने,आपने ही नही संसार के हर उस प्राणी ने की जिसने उसे प्रेम किया चाहा,उसकी जरुरत महसूस की हर संभव कोशिश की ,कुछ ने उसे पाया कुछ ने पकरे खोया .कुछ बिरलो ने तो उसकी खोज में  सारा संसार छोड़ दिया .किसीको वह 
मिला मंदिर में ,मस्जिद में,गुरूद्वारे में .किसी को शब्दों में ,किसी को चित्रों में तो किसी ने गीतों में उसे पा लिया .
नाद ब्रह्म स्वरुप हैं ,और संगीत ईश्वरीय कला .कभी वह सरस्वती स्वरूप हैं, 


कभी प्रथम पूज्य गणेश के उदर में बसा हुआ ,


कभी राधा के प्रेम विरह में ,

तो मीरा के भजन में ,

शंकर ,शारदा ,गणेश ,कृष्ण .ईश्वर के हर रूप से प्रस्फुटित हुआ हैं संगीत.
नए वर्ष की शुरुवात अगर खोज  के प्रथम स्वर और  अंतिम पड़ाव  से हो ,तो किसी भी संगीत प्रेमी और और संगीतज्ञ के लिए 
इससे सुखद और क्या हो सकता हैं ??
इन्टरनेट पर सर्च करते हुए मुझे कुछ बहुत अच्छी संगीतज्ञ ईश्वर की तस्वीरे मिली ..आप के लिए वही तस्वीरे ...